💫भव सागर के संकटों से तारने वाला मुल ग्रंथ है श्रीमद् रामायण -व्यास स्वामी दिलीप दास महाराज जी महाराज 💫
➡️ मेरठ: चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के अटल सभागार में राष्ट्रीय वैदिक हिंदू संगठन भारत द्वारा आयोजित तीन दिवसीय "सुनिये कथा रधुनाथ की कार्यक्रम" में श्री राम कथा का शुभारंभ हुआ। शुभारंभ के प्रथम दिन कथा व्यास स्वामी दिलीप दास जी महाराज(रघुवंश संकल्प सेवा ट्रस्ट श्री अयोध्या धाम के अध्यक्ष) ने प्रभु श्रीराम के जन्म की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि भव सागर के संकटों से तारने वाला मुल ग्रंथ है श्रीमद् रामायण। जिसका श्रवण जन्म जन्मांतर के कष्टों का हरण करने वाला है, साथ ही उन्होंने आत्मा को तृप्त करने के उपाय भी बताए। उन्होंने कहा कि अंतःकरण में क्रांति आने पर ही राष्ट्र में क्रांति आती है और राष्ट्र निर्माण होता है। राम चरित्र की विशेषता है यह जीवन की कला सिखाती है। जबकि भागवत कथा मोक्ष का मार्ग दिखाती है मोक्ष का तात्पर्य क्षय है संपत्ति, शक्ति, परिवार, मोह माया का नाश मोक्ष कहलाता है।
कथा के मुख्य यजमान शीतल गहलोत राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय वैदिक हिंदू संगठन भारत श्री रामवीर सोम राष्ट्रीय सचिव राष्ट्रीय वैदिक हिंदू संगठन भारत, एवं आलोक सिसौदिया पश्चिम उत्तर प्रदेश मीडिया प्रभारी भाजपा रहे। विशिष्ट अतिथि गणों में हरि नाथ सिंह यादव (जीएसटी कमिश्नर नोएडा), अनय कुमार मिश्रा (उपायुक्त स्वत रोजगार), अमरीश शर्मा (जिला विकास अधिकारी), सुनील कुमार सिंह (परियोजना निदेशक) रहे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय वैदिक हिंदू संगठन भारत की अध्यक्षा शीतल गहलोत, राष्ट्रीय सचिव -श्री रामवीर सोम, राष्ट्रीय महासचिव- रवि कुमार रस्तोगी, राष्ट्रीय सलाहकार- अजय कुमार, राष्ट्रीय संरक्षक-गिरीश बंसल, मीडिया प्रभारी-पारस गुप्ता आदि प्रमुख से उपस्थित रहे।
श्री राम कथा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अटल सभागार में 8 सितंबर तक चलेगी कथा समय दोपहर 3:00 बजे से 7:00 बजे तक रहेगा ।
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें