कोरोना काल के कारण ध्वस्त हुई बाजार व्यवस्था के लिए सरकार को गाली तो दी जा सकती है लेकिन किसी भी व्यापारिक संगठन या सत्ता पक्ष के नेताओं ने बाजारों को पॉल्यूशन फ्री और क्राइम फ्री बनाने की नहीं सोची. आलम यह है कि आज देश के अधिकतर बाजार मीट, शराब और अपराधिक
वारदातों के अड्डे बन चुके हैं. आम आदमी या तो ऑनलाइन शॉपिंग कर रहा है या पॉल्यूशन फ्री जोन में बिक्री के लिए मॉल जा रहा है औंर एक ही छत के नीचे सभी घरेलू सामान पा रहा है. गैर मोबाइल यूजर या अत्यधिक गरीब व्यक्ति ही बाजार में आ रहा है और आम व्यापारी की रोजी-रोटी चला रहा है. व्यापारी नेताओं के सियासी बनने की कीमत पूरे देश का दुकानदार चुका रहा है.
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