पाकिस्तान के दो कायद ए आजम हैं। एक जिन्ना और दूसरा मौलाना मौदूदी। जब पाकिस्तान बना तो कोल्हापुर महाराष्ट्र से मौलाना मौदूदी पाकिस्तान को सच्चा इस्लामी मुमलिकत बनाने के लिए पाकिस्तान चले गये। वहां उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं हुआ। पाकिस्तान बन तो गया था इस्लाम के नाम पर परंतु मिश्रित संस्कृति से अलग हुए मुसलमान एकदम से पाजामे और दाढी पर कैसे आ जाते? यही बात मौलाना को बुरी लगती थी इसलिए वो पाकिस्तान में रहनेवाले हर जन मानस को सच्चा मुसलमान बनाना चाहते थे।
मौलाना मौदूदी बहुत परेशान किये गये क्योंकि वो जिस सच्चे इस्लाम की बात कर रहे थे उस कट्टरता के लिए सिन्धी पंजाबी मुसलमान तैयार नहीं थे। अंततः बीमारी में मौलाना अमेरिका चले गये और वहां से लौटकर फिर कभी पाकिस्तान नहीं आये। परंतु जैसै जैसे समय बीता मौलाना के बोये बीज पौधे और पेड़ बनकर पाकिस्तान की धरती पर खड़े होने लगे।
आज का पाकिस्तान जिन्ना का पाकिस्तान नही मौलाना मौदूदी का पाकिस्तान है। इस पाकिस्तान को केवल पाकिस्तान में ही इस्लाम का सच्चा अमल स्थापित नहीं करना है, अपितु पूरे विश्व को सच्चे इस्लाम से रूबरू करवाना है। वैसे ही जैसै मिस्र के हसन अल बन्ना ने करवाया। पिरामिड वाले देश को काले तंबू वाले देश में प्ररिवर्तित करके।
मौदूदी के पाकिस्तान को इस्लामिक जगत का नेतृत्व चाहिए। उसके(पाकिस्तान) दिमाग में ये बात बैठ गयी है कि न तो सऊदी अरब सही इस्लामी आचरण कर रहा है और न तुर्की या मिस्र। सही इस्लाम की सही जानकारी सिर्फ उसके पास है इसलिए अब विश्व में इस्लाम के लिये कहीं कुछ हो जाए तो प्रतिक्रिया की आवाज पाकिस्तान से ही आती है। चाहे स्पेन का मामला हो या अब फ्रांस का। पाकिस्तानी फ्रांस को सबक सिखायेंगे। फ्रांस के मंहगे डिजाइनर सामानों का बहिष्कार करके भले ही पाकिस्तान में फ्रांस की कोई कंपनी व्यापार ही न करती हो।
पाकिस्तान स्वप्न लोक में एक अलग लेवल पर जा चुका है, जहां से वापस लौटना उसके लिए अब संभव नहीं है।
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